ऋषि पंचमी के दिन होती है इन सप्तऋषि की पूजा, जानें इन ऋषियों के नाम

ऋषियों को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष हमारे देश में ऋषि पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन सप्तऋषियों का पूजन किया जाता है. आकाश मे 7 तारों के एक समूह, जो कि किसी चम्मच के आकार का नज़र आता है, उसे सप्त ऋषि कहते हैं. हालांकि इनके नाम के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. तो आइए जानते हैं कौन-से है वे सात ऋषि ? हमारे वेदों और शास्त्रों में भी इन सभी ऋषियों का उल्लेख मिलता है. आपको जानकारी के लिए बता दें कि भादो माह की शुक्ल पक्ष पंचमी को भारत में ऋषि पंचमी मनाई जाती है.

1) वशिष्ठ-

वशिष्ठ जी को कौन नहीं जानता है. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के कुल गुरु के रूप में दुनियाभर में वशिष्ठ जी प्रसिद्द है.

2) विश्वामित्र-
सप्तऋषियों में दूसरा स्थान आता है विश्वामित्र जी का. विश्वामित्र जी ने ही गायत्री मंत्र की रचना की थी. विश्वामित्र ऋषि होने से पहले एक राजा थे और बाद मे तपस्या के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ऋषि बनें.

3) कण्व :
वैदिक काल के ऋषि कण्व थे. ऐसा कहा जाता है कि 103 सूक्त वाले ऋग्वेद के आठवें मण्डल के अधिकांश मंत्रों के रचयिता कण्व ही थे.

4) भारद्वाज :
वैदिक काल के सबसे महान ऋषियों भारद्वाज जी का नाम शामिल है. बता दें कि ऋग्वेद के छठे मंडल के 765 मंत्रों के रचनाकार भारद्वाज जी है.

5) अत्रि :
ब्रह्मा जी के पुत्र के साथ ही अत्रि महाऋषि के रूप में भी जाने जाते हैं. अत्रि को पारसी समुदाय के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है.

6) वामदेव :
वामदेव संगीत के जनक माने जाते हैं.

7) शौनक :
शौनक ऋषि गुरुकुल परंपरा के जनक माने जाते हैं. प्राचीन समय में दस हज़ार शिष्यों के गुरुकुल का संचालन उन्होंने किया था और साथ ही उन्होंने कुलपति का सम्मान हासिल किया था.

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