इन विशेष परिस्थितियों में भगवान शिव के इस मंत्र का करना चाहिए जाप

आज सोमवार है और आप जानते ही होंगे यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भोलेनाथ का पूजन किया जाता है। वैसे आज हम आपको बताने जा रहे हैं उनके सबसे प्रभावशाली महामृत्युंजय मंत्र के बारे में। हम आपको बताएंगे महामृत्युंजय मंत्र के जाप की विधि क्या है? महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है? महामृत्युंजय मंत्र के जाप से होने वाले लाभ क्या हैं? आइए जानते हैं।

कहा जाता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष परिस्थितियों में करना चाहिए। जी दरअसल अकाल मृत्यु, महारोग, धन-हानि, गृह क्लेश, ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, सजा का भय, प्रॉपर्टी विवाद, समस्त पापों से मुक्ति आदि जैसी स्थितियों में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके जाप से चमत्कारिक लाभ देखने को मिलते हैं। कहा जाता है इन सभी समस्याओं से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप करना होता है जो लाभदायक होता है।

संपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र –  ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।

लघु मृत्युंजय मंत्र – ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ।

महामृत्‍युंजय मंत्र का अर्थ- ‘इस पूरे संसार के पालनहार, तीन नेत्र वाले भगवान शिव की हम पूजा करते हैं। इस पूरे विश्‍व में सुरभि फैलाने वाले भगवान शंकर हमें मृत्‍यु के बंधनों से मुक्ति प्रदान करें, जिससे कि मोक्ष की प्राप्ति हो जाए।’

महामृत्‍युंजय मंत्र जप की विधि – महामृत्‍युंजय मंत्र का जाप कुल मिलाकर सवा लाख बार करना चाहिए। इसी के साथ भोलेनाथ के लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप 11 लाख बार करना चाहिए। केवल इतना ही नहीं सावन के महीने में इस मंत्र का जाप अत्यंत ही कल्याणकारी होता है। इसके अलावा अगर आप किसी अन्य माह में इस मंत्र का जाप करना चाहते हैं तो सोमवार ​के दिन से इसका आरम्भ करें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दोपहर 12 बजे के बाद महामृत्‍युंजय मंत्र का जाप न करें।

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