इस नवरात्रि इन 12 शक्तिपीठो की जानिए विशेषता

यूँ तो माँ भगवती साक्षात प्रकृति हैं इसलिए वे कण-कण में विराजमान हैं. उनका पूजन भारत का हर दुर्गा मंदिर में होता ही है परन्तु कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां माता की साक्षात उपस्थिति महसूस की जा सकती है। जहां माता के चमत्कार देखे जा सकते हैं। ये मंदिर शक्तिपीठ कहलाते हैं। इन शक्तिपीठो में कुछ बहुत प्रसिद्द है, इनके साथ ही कुछ अन्य दुर्गा मंदिर भी हैं जहां भक्तो की भीड़ लगी रहती है।

1.  वैष्णोदेवी मन्दिर: यह दुनियाभर में सबसे पंवित्र और प्रसिद्ध मंदिर है जो कि 5300 फिट की ऊंचाई वाली त्रिकुटा पर्वत, जम्‍मू और कशमीर में बसा हुआ है। यह भारत में तिरूमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक देखा जाने वाला धार्मिक तीर्थ-स्थल है।

2. करणी माता मंदिर: बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्थित करणी माता के मंदिर परिसर में कई हजार चूहे रहते हैं। मंदिर में रहने वाले ये चूहे करणी माता की संतान माने जाते हैं।

3. चामुंडा देवी मंदिर: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ये मंदिर ऊर्जा माँ के चामुंडा स्वरूप को समर्पित है। चण्ड और मुंड नामक दो राक्षसों का वध करने के कारण माता का नाम चामुंडा पड़ा।

4. कालकाजी मंदिर : दिल्ली में सूर्यकूट पर्वत पर विराजमान कालकाजी मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसी जगह आदिशक्ति माता भगवती ‘महाकाली’ के रूप में प्रकट हुई और रक्तबीज का संहार किया।

5. अम्बाजी मंदिर: प्राचीन 51 शक्तिपीठों में से एक अम्बाजी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहाँ पर भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था। वहीं भगवान राम भी शक्ति की उपासना के लिए यहाँ आ चुके हैं। मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर गब्बर नामक पहाड़ जहां एक पत्थर पर माँ के पदचिह्न बने हैं।

6. मंगला गौरी मंदिर: वाराणसी में स्थित इस मंदिर में माना जाता है कि अविवाहित कन्याएं यदि मां का दर्शन करेंगी तो उन्हें सर्वगुण सम्पन्न वर और निःसंतान दम्पत्ति को दर्शन करने से बच्चे की प्राप्ति होगी।

7. दुर्गा मंदिर: ये मंदिर काशी के पुरातन मंदिरॊ मॆ सॆ एक है। लाल पत्थरों से बने अति भव्य इस मंदिर के एक तरफ “दुर्गा कुंड” है।इस मंदिर में माँ दुर्गा “यंत्र” रूप में विरजमान है।  कुछ लोग यहाँ तंत्र पूजा भी करते हैं।

8. कनकदुर्गा मंदिर: माना जाता है कि विजयवाड़ा के केंद्र में स्थापित इस मंदिर में स्थापित कनक दुर्गा माँ की प्रतिमा ‘स्वयंभू’  है।

9. ज्वालामुखी मंदिर: पांडवो द्वारा खोजे गए माँ का यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहाँ पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा होती है।अकबर ने भी इन ज्वालाओ को बुझाने का प्रयत्न किया, पर उसे हार मानना पड़ी।

10. नैना देवी: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में स्थित इस मंदिर में देवी सती के नैन यानि आंखें गिरी थीं। माता नैना देवी अपने इस भव्य मंदिर में पिंडी रूप में स्थापित हैं।

11. दक्षिणेश्वर काली मंदिर: कोलकाता में स्थित ये मंदिर माँ काली का मुख्य मंदिर है। रामकृष्ण परमहंस इस मंदिर के पुजारी थे.  माना जाता है की माँ काली उन्हें साक्षात दर्शन देती थी।

12. कामाख्या मंदिर: माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा जाता है।  यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। इस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति नहीं है यहां प्रतिवर्ष 3 दिन अम्बुवाची पर्व मनाया जाता है जो माँ के रजस्वला होने का प्रतिक होता है।इसलिए इस मंदिर का तांत्रिक महत्व है।

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