उंगलियों में छुपे होते हैं कई रहस्य, ये उंगली देती है अशुभ संकेत

हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं तथा बनावट से मनुष्य की जिंदगी और भविष्य में आने वाली परिस्थितियों से संबंधित कई बातों की भविष्यवाणी की जाती है। वहीं, हाथ की उंगलियां भी मनुष्य का भाग्य बताने में सहायता करती हैं। हाथ की कनिष्ठिका, अनामिका, मध्यमा, तर्जनी तथा अंगूठा इन पांचों उंगलियों का व्यक्तित्व से कनेक्शन होता है। हस्तरेखा के मुताबिक, अगर क‍िसी मनुष्य की तर्जनी उंगली अनामिका से छोटी हो तो ये अशुभ संकेत है। माना जाता है कि ऐसे व्यक्ति जल्दी निराश हो जाते हैं। साथ ही अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में दूसरों को हानि पहुंचाने की भी परवाह नहीं करते।
आइए जानते हैं हस्तरेखा में उंगलियों की अहमियत:- * जिन व्यक्तियों की उंगल‍ियां लंबी एवं पतली होती हैं, वो बहुत क्रिएटिव होते हैं। साथ ही ऐसे व्यक्ति दूसरों की सहायता करने में भरोसा रखते हैं। * हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक, तर्जनी उंगली लंबी होने पर मनुष्य बुद्धिमान और ज्ञानी होता है। ऐसे व्यक्तियों में लीडर बनने की क्षमता होती है। * जिन व्यक्तियों की मध्यमा मतलब शनि की उंगली लंबी होती है वो कभी मेहनत करने से पीछे नहीं हटते। काम को मन लगाकर पूरा करते हैं। * हस्तरेखा के मुताबिक, ज‍िन व्यक्तियों की तर्जनी उंगली अनामिका के समान होती है, वह बहुत ईमानदार एवं वफादार होते हैं। * हस्तरेखा में माना जाता है कि जिनकी अनामिका उंगली लंबी होती वो धन कमाने के मामले में बहुत भाग्यशाली होते हैं। * हस्तशास्त्र में हाथ के अंगूठे का ज्यादा मोटा होना ठीक नहीं माना जाता। मोटे अंगूठे वाले मनुष्य का व्यवहार गुस्सैला होता है। * अगर अंगूठा का झुकाव बाहर की तरफ होता है तो शख्स में आत्मविश्वास व कार्यकुशलता का गुण होता है। * जिन व्यक्तियों की तर्जनी उंगुली का झुकाव मध्यमा की होता है वो विनम्र व्यक्तित्व और खुले मिजाज वाले होते हैं। * मध्यमा उंगली छोटी होने पर मनुष्य निराशावादी तथा कुंठित स्वभाव का होता है। * हस्तरेखा के मुताबिक, जिन व्यक्तियों के हाथ में छह उंगलियां होती हैं वो भाग्यशाली होते हैं।
नर्मदा जयंती पर माँ नर्मदा की जरुर करें ये आरती
अगर आप धारण कर रहे है रत्न तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान

Check Also

शनिदेव: भाग्यदेवता को यंत्र से करें खुश, शनि का यंत्र है अत्यंत फलदायी

शनिदेव के उपायों में तेल तिलहन का दान, रत्नों का धारण एवं मंत्र जाप प्रमुखता …