चाणक्य नीति: बड़े प्रयासों को पूरा करने के लिए टीम बनाने पर जोर देना है आवश्यक

आचार्य चाणक्य ने राजनीति में बड़ी सफलता प्राप्त की थी. उन्होंने दो बड़े युद्धों में महती भूमिका निभाई थी. सिकंदर को हराने में चाणक्य की अहम भूमिका थी. उन्होंने सिकंदर को पराजित करने के लिए तिनके समान दिखने वाले छात्रों की इतनी सबल फौज खड़ी की कि सिकंदर के सिपहसालार परास्त हो गए.

यह सब उन्होंने टीम भावना के तहत किया. इसके लिए एक सक्षम टीम का निर्माण किया. बड़े प्रयासों में टीम के मजबूती आवश्यक है. सबल टीम ही अकाट्य दिखने वाले मार्ग पर सहजता से चल पड़ती है.

चाणक्य ने धननंद को परास्त करने के लिए ज्ञान विवेक के साथ सक्षम टीम का सहारा लिया. मगध जैसे विकसित राज्य को उन्होंने चतुराई से परास्त किया। इसमें उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

कहावत भी है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है. लेकिन असंख्य चनों के एक प्रयास से असंभव भी संभव हो सकता है. ऐसा ही चाणक्य ने किया. उन्होंने न सिर्फ छात्रों की सैन्य टुकड़ी बनाई बल्कि उसका सक्षम नेतृत्व भी किया.

चाणक्य नीति कहती है कि सफलता संगठन में हैं. जुटिए और आगे बढ़िए. हर अवरोध आपके समक्ष शून्य नजर आएगा. आज के परिप्रेक्ष्य में समझें तो राजनीतिक संघर्ष हो अथवा आंदोलन लोगों का समग्रता में आगे आना ही सामूहिक उपलब्धियों को बढ़ाता है. अकेला व्यक्ति प्रयासों में बेहतर अवश्य हो सकता है लेकिन सफलता समुच्चय से सबल होती है.

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