रावण की तीन इच्छाएं रह गई थी अधूरी, जानिए….

रावण की तीन इच्छाएं अधूरी रहीं. रावण आलस के कारण ये कार्य नहीं कर पाए थे जबकि वे जब चाहते उस पूरा कर सकते थे. ये उपलब्धियाँ उनकी पहुंच में थीं. मरते समय लक्ष्मण को रावण ने यह सीख दी थी कि समय रहते कार्य कर लो जीवन में सयम का बड़ा महत्व होता है.
रावण की ये तीन इच्छाएं थीं, सोने में सुगंध पैदा करना, स्वर्ग तक सीढी बनाना और समुद्र का पानी मीठा करना. वो दिग्विजयी रावण जिसने देवताओं को अपना चाकर बनाया हुआ था उसके लिए यह करवाना कोई बड़ी बात नहीं थी फिर भी आलस्य के कारण पूरा नहीं कर पाए थे.

मृत्यु के पूर्व जब रावण युद्ध भूमि में अपने अंतिम समय की प्रतीक्षा कर रहे थे, राम ने लक्ष्मण को उनसे सीख लेने को भेजा. लेकिन लक्ष्मण रावण के सिर की तरफ खड़े हुए तो रावण ने कुछ भी नहीं कहा. तब राम ने लक्ष्मण को समझाया कि रावण मृत्य शैय्या पर हैं तो क्या हुआ वे प्रकांड विद्वान हैं. अगर किसी से ज्ञान चाहिए तो श्रद्धापूर्वक और विनयवत होने से मिल सकता है. दूसरी बार लक्ष्मण ने रावण के पैरे के पास खड़े होकर विनय पूर्वक जीवन में सफल होने के लिए ज्ञान मांगा. रावण ने एक ही ज्ञान दिया कि जीवन में कभी आलस मत करना अन्यथा समय हाथ से निकल जाएगा.

लक्ष्मण जी ने पूछा क्या आप इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण दिखा सकते हैं. तब रावण ने लक्ष्मण से सात हरे पत्ते और एक बबूल का कांटा लाने को कहा. लक्ष्मण जब पेड़ के हरे सात पत्ते और बबूल का कांटा ले कर आए तब रावण ने अपनी ज्योतिष विद्या से ग्रह नक्षत्रों की गणना की, एक निश्चित क्षण में सातों पत्तों को बबूल के कांटें से एक के ऊपर एक रख कर भेद दिया. रावण के कांटा भेदने पर पहला पत्ता सोने का दूसरा चांदी का इसी तरह अन्य धातुओं में बदल गए लेकिन अंतिम का पत्ता हरा का हरा रहा. रावण ने समझाया समय कितना महत्वपूर्ण होता है. इस नक्षत्र में कांटा भेदने से पत्ते स्वर्ण के होने थे लेकिन उस क्षण के इतने अल्प समय में परिणाम बदल गए और देखो अंतिम पत्ता हरा का हरा रहा.

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