साल में दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?

हनुमान जी, जो भगवान श्री राम के परम भक्त हैं, की पूजा का विशेष महत्व है। हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा जाता है, क्योंकि वह व्यक्ति के सभी दुःख, दर्द हर लेते हैं। वहीं हनुमान जयंती का दिन भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस तिथि पर हनुमान जी का जन्म हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल में दो बार हनुमान जयंती मनाई जाती है। चलिए जानते हैं इसके पीछे का कारण

हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti 2024)

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, हनुमान जी का जन्म कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर स्वाति नक्षत्र में हुआ था। जो साल 2024 में इसलिए इस तिथि को हनुमान जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाने वाली हनुमान जयंती के पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है।

इसलिए मनाई जाती है दूसरी हनुमान जयंती

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार बचपन में जब हनुमान जी को भूख लगी, तो वह सूर्य को फल जानकर उसे खाने के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने सूर्य को निगलने की कोशिश की, जिससे पृथ्वी पर अंधेरा छाने लगा। जब यह बात इंद्रदेव को पता चली तो उन्होंने हनुमान जी को रोकने के लिए अपने वज्र से प्रहार कर दिया, जिस कारण हनुमान जी मूर्छित हो गए।

जब इस बात का पता पवनदेव को चला तो, वह अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने पूरे ब्रह्रांड की प्राण वायु रोक दी। जिस कारण धरती पर हाहाकार मच गया। तब ब्रह्राजी ने पवनदेव को शांत कराते हुए हनुमान जी को जीवनदान दिया। माना जाता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर ही हनुमान जी को नया जीवनदान मिला था। यही कारण है कि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भी हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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