बरसाना का राधा रानी मंदिर जिसे लाड़ली जी का मंदिर भी कहते हैं। यह भक्ति और प्रेम का केंद्र है। यह उत्तर प्रदेश के बरसाना में स्थित है और राधा रानी को समर्पित है। मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना है फिर भी यहां भक्तों की भारी कतार उमड़ती है।
हिन्दू धर्म में मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होते, बल्कि ये भक्ति, प्रेम और आत्मिक शांति के केंद्र माने जाते हैं। हर मंदिर की अपनी विशेषता और अपनी कथा होती है। ऐसे ही मंदिरों में से एक है बरसाना का राधा रानी मंदिर, जिसे प्रेम से लाडली जी का मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के बरसाना में स्थित है और पूर्ण रूप से श्री राधा रानी को समर्पित है।
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जिसने बरसाना की रानी लाड़ली जी के दर्शन कर लिए, उसके जीवन में प्रेम और भक्ति का रस कभी कम नहीं होता।
मंदिर का स्वरूप और स्थान
बरसाना का राधा रानी मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जिसे बरसाने का माथा कहा जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 250 मीटर है। भक्तजन जब सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हैं, तो हर कदम पर भक्ति और उत्साह की अनुभूति करते हैं।
ऊपर पहुंचते ही एक दिव्य वातावरण मिलता है। मंदिर का विशाल आंगन, घंटियों की ध्वनि, भजन-कीर्तन और फूलों की महक मन को अद्भुत शांति और आनंद से भर देती है। यहां राधा रानी को लाडली जी कहकर पुकारा जाता है, और भक्त उनके चरणों में अपने प्रेम और श्रद्धा अर्पित करते हैं।
राधा रानी का जन्म
राधा जी के पिता का नाम वृषभानु जी और माता का नाम कीर्ति जी था। उनका जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुआ था, जो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लगभग 15 दिन बाद आता है। इस दिन बरसाना में भव्य उत्सव होता है। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है, विशेष श्रृंगार किया जाता है और राधा जी को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है।
भक्तजन इस अवसर पर राधा जी को लाड़ली जी कहकर गीत, भजन और नृत्य द्वारा अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं।
लाडली जी मंदिर के प्रमुख उत्सव
बरसाना का राधा रानी मंदिर सालभर भक्ति और उल्लास से भरा रहता है, लेकिन कुछ त्यौहार यहां विशेष धूमधाम से मनाए जाते हैं –
राधाष्टमी – यह राधा जी का जन्मदिन है। इस दिन मंदिर में राधा रानी का विशेष श्रृंगार होता है। भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं और मंदिर परिसर फूलों की वर्षा से महक उठता है।
कृष्ण जन्माष्टमी – श्रीकृष्ण के जन्मदिवस पर यहां अद्भुत सजावट होती है। राधा-कृष्ण के झूले सजाए जाते हैं और भक्त पूरी रात भक्ति-रस में डूबे रहते हैं।
लट्ठमार होली – बरसाना की सबसे प्रसिद्ध परंपरा। इस दिन महिलाएं खेल-खेल में पुरुषों को लट्ठ से मारती हैं और पुरुष ढाल लेकर रक्षा करते हैं। यह दृश्य देखने के लिए देश-विदेश से हजारों लोग यहां आते हैं। बरसाना की होली रंगों और प्रेम की होली होती है।
फूलों की होली और रंग पंचमी – बरसाने और वृंदावन की फूलों वाली होली अनोखी होती है। यहां रंगों के स्थान पर सुगंधित फूलों की वर्षा होती है। मंदिरों में भक्तजन प्रेम और भक्ति से फूल बरसाते हैं। यह दृश्य वातावरण को दिव्य बना देता है, मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।