कालाष्टमी पर इस खास तरीके से करें भैरव बाबा की आरती

कालाष्टमी का दिन साहस, सुरक्षा और न्याय के देवता भगवान काल भैरव को समर्पित है। साल 2026 में माघ महीने की कालाष्टमी का विशेष महत्व है। काल भैरव को शिव का पांचवां अवतार माना जाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। अक्सर हमारे जीवन में कुछ ऐसे गुप्त शत्रु होते हैं, जो सामने तो नहीं आते, लेकिन वे हमारे जीवन में कई तरह से बाधा डालते हैं। ऐसे शत्रुओं को शांत करने के लिए भैरव बाबा की विधिवत पूजा करनी चाहिए। वहीं, कालाष्टमी की पूजा भैरव बाबा की आरती के बिना अधूरी मानी जाती है, तो आइए यहां भैरव बाबा की आरती करते हैं।

।।श्री भैरव जी की आरती।।
सुनो जी भैरव लाडले, कर जोड़ कर विनती करूं
कृपा तुम्हारी चाहिए , में ध्यान तुम्हारा ही धरूं

मैं चरण छूता आपके, अर्जी मेरी सुन सुन लीजिए
मैं हूँ मति का मंद, मेरी कुछ मदद तो कीजिए

महिमा तुम्हारी बहुत, कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूं
सुनो जी भैरव लाडले…

करते सवारी श्वानकी, चारों दिशा में राज्य है
जितने भूत और प्रेत, सबके आप ही सरताज हैं |
हथियार है जो आपके, उनका क्या वर्णन करूं
सुनो जी भैरव लाडले…

माताजी के सामने तुम, नृत्य भी करते हो सदा
गा गा के गुण अनुवाद से, उनको रिझाते हो सदा
एक सांकली है आपकी तारीफ़ उसकी क्या करूँ
सुनो जी भैरव लाडले…

बहुत सी महिमा तुम्हारी, मेहंदीपुर सरनाम है
आते जगत के यात्री बजरंग का स्थान है
श्री प्रेतराज सरकारके, मैं शीश चरणों मैं धरूं
सुनो जी भैरव लाडले…

निशदिन तुम्हारे खेल से, माताजी खुश होती रहें
सर पर तुम्हारे हाथ रखकर आशीर्वाद देती रहे

कर जोड़ कर विनती करूं अरुशीश चरणों में धरूं
सुनो जी भैरव लाड़ले, कर जोड़ कर विनती करूं।।

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