उस साधु के कदमों में था जादू, जब नाचता तो खूब बरसते बादल

phpThumb_generated_thumbnail (58)किसी गांव में एक साधु रहते थे। वो जब भी नृत्य करते बारिश होने लगती। गांव के लोगों को जब भी बारिश की जरूरत होती थी, तो वे साधु को याद करते। यह बात शहर के चार लड़कों को पता चली। उन्हें यकीन नहीं हुआ। 
 
शहरी स्कूलों में पढ़ाई के घमंड में उन्होंने गांव वालों को चुनौती दे दी कि हम भी नाचेंगे तो बारिश होगी। अगर हमारे नाचने से नहीं हुई तो उस साधु के नाचने से भी नहीं होगी। फिर क्या था, अगले दिन सुबह-सुबह ही गांव वाले उन लड़कों को लेकर साधु की कुटिया पर जा पहुंचे। 
  
साधु को पूरी बात बताई। लड़कों ने नाचना शुरू किया। आधा घंटा बीता और पहला लड़का थक कर बैठ गया पर बादल नहीं दिखे। कुछ देर में दूसरे ने भी यही किया और एक घंटा बीतते-बीतते बाकी दोनों लड़के भी थक कर बैठ गए, पर बारिश नहीं हुई। 
 
अब साधु की बारी थी, उसने नाचना शुरू किया। एक घंटा बीता, बारिश नहीं हुई। साधु नाचता रहा। दो घंटे बीते। बारिश नहीं हुई। लेकिन साधु तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। धीर-धीरे शाम ढलने लगी कि तभी बादलों की गडग़ड़ाहट सुनाई दी और जोरों की बारिश होने लगी। 
 
लड़के दंग रह गए। उन्होंने साधु से क्षमा मांगी और पूछा, बाबा भला ऐसा क्यों हुआ कि हमारे नाचने से बारिश नहीं हुई और आपके नाचने से हो गई?
  
साधु ने उत्तर दिया, जब मैं नाचता हूं, तो दो बातों का ध्यान रखता हूं। पहली बात मैं ये सोचता हूं कि अगर मैं नाचूंगा तो बारिश को होना ही पड़ेगा और दूसरी यह कि मैं तब तक नाचूंगा जब तक कि बारिश न हो जाए। यही दृढ़ निश्चय मुझे हमेशा विजेता बनाता है।
 
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