संत के चमत्कार से यहां अंगुली पर उठा सकते हैं 90 किलो का पत्थर!

hazrat-qamar-ali-darvesh-5594f2fdce9b9_lआस्था की शक्ति असंभव को भी संभव बना देती है। यह कथन हमने कई बार सुना है.. लेकिन क्या आपने इसे हकीकत में तब्दील होते देखा है। अगर नहीं, तो आपको कमर अली दरवेश की मजार का नजारा देखना चाहिए।

यहां लोग सिर्फ एक अंगुली से 90 किलो का पत्थर उठा सकते हैं। यह मजार पुणे से करीब 25 किमी की दूरी पर खेड़ शिवपुर गांव में स्थित है।

यह एक छोटा-सा गांव है लेकिन मजार की वजह से बहुत प्रसिद्ध है। यहां आसपास के गांवों के अलावा महाराष्ट्र और देश-विदेश से भी लोग आते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि कमर अली दरवेश बहुत सिद्ध संत थे।

उनकी शक्ति का चमत्कार लोग आज भी महसूस कर सकते हैं। यहां एक पत्थर रखा हुआ है जिसका वजन 90 किलो है। सामान्य मनुष्य के लिए इसे उठाना तो दूर हिलाना भी बहुत कठिन होता है लेकिन जब बाबा कमर अली का नाम लेकर 11 लोग इसे उठाने की कोशिश करते हैं तो वे अपनी तर्जनी अंगुली पर भी इसे उठा सकते हैं।

संत को मिली चुनौती

कहा जाता है कि करीब 800 साल पहले हजरत कमर अली इस इलाके में आए तो यहां एक व्यायामशाला थी। वहां पहलवान कसरत कर रहे थे। अपनी शक्ति के घमंड में उन पहलवानों ने बाबा का मजाक बनाना शुरू कर दिया।

उन्होंने हजरत कमर अली को चुनौती दी कि वे यहां रखा पत्थर उठाकर दिखाएं। तब हजरत ने परमात्मा का स्मरण किया तो उसकी शक्ति से भारी-भरकम पत्थर भी हवा में उड़ने लगा।

उसी पत्थर को आज 11 लोग हजरत कमर अली का नाम लेकर अपनी अंगुली पर उठा सकते हैं। इस चमत्कार की एक और खासियत है। पत्थर उठाने के लिए सिर्फ 11 लोग ही चाहिए, न कम और न ज्यादा। साथ ही पत्थर सिर्फ दरगाह परिसर में ही उठाया जाए। यहां से बाहर ले जाने पर पत्थर को नहीं उठा सकते।

गौरतलब है कि हजरत कमर अली का 18 साल की उम्र में ही देहांत हो गया था। परमात्मा की भक्ति और चमत्कारों की वजह से लोग उन्हें एक महान संत मानते हैं। उनकी दरगाह में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। हर साल यहां हर धर्म और जाति के अनेक श्रद्धालु आते हैं और अपनी आंखों से हजरत के चमत्कार देखते हैं। 

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